Default Theme
AIIMS NEW
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली
All India Institute Of Medical Sciences, New Delhi
कॉल सेंटर:  011-26589142

त्‍वचा एवं रतिज रोग विज्ञान

संकाय

प्रोफेसर और प्रमुख /td> वी. के. शर्मा
प्रोफेसर नीना खन्‍ना के. के. वर्मा
अपर प्रोफेसर एम. रामम
एसोसिएट प्रोफेसर बिनोद के खेतान
सहायक प्रोफेसर सुजॉय खंडपुर
  जी. सेतुरमन

इतिहास

इस विभाग की स्‍थापना 1950s स्‍वर्गीय प्रो. के सी कंधारी के नेतृत्‍व में और इसके पश्‍चात दिग्‍गज जैसे प्रो. एल के भूटानी (1974-1996 ), प्रो. जेएस पसरिचा ( 1996-8 ) और प्रो. आर के पांधी (1998-2001) ने विभाग का नेतृत्‍व किया। प्रो. के सी कंधारी और प्रो. एल के भूटानी ने विभाग की मूलभूत आधारशिला रखी और डर्मेटोलॉजिक प्रशिक्षण मॉड्यूल की शुरूआत की, जिसे अब भी छोटे मोटे संशोधनों के साथ अपनाया जा रह है।

सुविधाएं

विभाग 30,000 से अधिक बाह्य रोगियों और 3000 आंतरिक रोगियों की जरूरतें

प्रतिवर्ष पूरी करता है। रोगियों के लिए निम्‍नलिखित सुविधाएं उपलब्‍ध हैं :

त्‍वचा रोगों का उपचार

बाल, एलोपेसिया आदि के रोग का उपचार

यौन संचारित रोगों का उपचार

कुष्‍ठ रोग का उपचार

विटिलिगो, सोरियासिस, एक्जिमा का उपचार

त्‍वचा की समस्‍याओं का सर्जिकल उपचार

पैम्फिगस का विशेष उपचार

उपलब्‍ध उपकरण और सुविधाएं

पीयूवीए कक्ष

कार्बन डाइऑक्‍साइड लेजर

इलेक्‍ट्रोकॉटरी

पल्‍स डाइ लेजर शीघ्र लाया जा रहा है

हिस्‍टोपैथोलॉजी और इम्‍युनोफ्लोरोसेंस

माइकोलॉजी और कवक संवर्धन

एड्स का उपचार और परामर्श तथा बिस्‍तर

प्रशिक्षण

स्‍नातक एमबीबीएस छात्रों और इंटर्न्‍स के लिए प्रशिक्षण

स्‍नातकोत्तर एमडी डर्मेटोलॉजी और वेनेरोलॉजी

ट्रॉपिकल डर्मेटोलॉजी और वेनेरोलॉजी में विदेशी स्‍नातक

एमडी डर्मेटोलॉजी डिग्री धारकों के लिए अल्‍पावधि पुनश्‍चर्या प्रशिक्षण

कॉन्‍टेक्‍ट डर्मेटाइटिस में आईएडीवीएल अध्‍येतावृत्तियां, पल्‍स उपचार

.

विभाग की उपलब्धियां

हमारे संस्‍थान में लाई गई नई अन्‍वेषणात्‍मक प्रौद्योगिकियां

(i) त्‍वचा रोगों का नवाचारी प्रबंधन

पैम्फिगस : डेक्‍सामेथेसोन साइक्‍लोफॉस्‍फेमाइड पल्‍स उपचार

ओरल बीटामेथेसॉन पल्‍स उपचार

कोलेजन वेस्‍कुलर रोग : डेक्‍सामेथेसोन पल्‍स उपचार

वायु जनति संपर्क डर्मेटाइटिस, लाइकेन प्‍लेनस, एटोपिक डर्मेटाइटिस के उपचार में

एजाथियोप्राइन

एलोपेसिया एरिटा : डाइफेन्‍सीप्रोन के साथ उपचार

300 मि. ग्रा. मौखिक प्रेडनीसोलोन बोलस

साइसीटोमा : माइसीटोमा के लिए दो चरण का उपचार

(ii) नवाचार

पैच परीक्षण के लिए भारतीय मानक श्रृंखला

  • स्‍पर्श, दर्द और ताप संवेदनशील परीक्षण और ग्रेडिंग युक्ति, नेसल फिल्‍टर
  • डर्मोग्रेडर
  • क्राइयोस्टिमुलेशन परीक्षण
  • भोजन से एलर्जी के लिए संपूर्ण आहर निष्‍कासन
  • क्‍यूटेनियस तपेदिक के लिए चार सप्‍ताह का एक चिकित्‍सीय परीक्षण
  • संपर्क अति संवेदनशीलता का टाइटर
  • गंभीर औषधि प्रतिक्रिया के लिए प्रोवोकेशन परीक्षण
  • एल्‍युमिनियम पैच परीक्षण कक्ष

अनुसंधान पूर्ण 2000-2001

  1. विटिलिगो के उपचार में ब्रॉड बैंड यूवी-बी

सत्रह रोगी (9 पुरुष, 8 महिलाएं) जिनकी आयु 10 से 40 के बीच थी, उनका इलाज वाल्‍ड मैन्‍स यूवी 7001 के यूनिट द्वारा सप्‍ताह में दो बार ब्रॉड बैंड यूवी-बी के साथ किया गया था। ग्‍यारह रोगियों को 4-6 माह की अवधि के लिए यूवी-बी के 25-44 (औसत 33) यूवी-बी के उद्भासन दिए गए। कुल 11 रोगियों में से 8 में (72.7%) में पुन: वर्णक आने का निरीक्षण किया गया और शेष 3 में कोई प्रतिक्रिया नहीं दशाई गई। यह पुन: वर्णक आने की प्रक्रिया विसरित हुई और यह केवल 10-25% की सीमा तक थी और किसी भी रोगी में संतोषजनक सौंदर्य सुधार नहीं देखा गया। यह निष्‍कर्ष निकाला गया था कि ब्रॉड बैंड यूवी-बी चार माह तक सप्‍ताह में दो बार देने पर विटिलिगो के लिए असरदार नहीं था।

जारी अनुसंधान

  1. पॉम्‍फोलिक्‍स की इटियोलॉजी में संपर्क एलर्जन की भूमिका
  2. पार्थेनियम डर्मेटाइटिस का प्राकृतिक इतिहास
  3. हाइड्रॉ‍क्‍सीयूरिया से सोरियासिस का उपचार
  4. माइनोडिक्सिल और बीटा मेथेसोन डाइप्रोपियोनेट संयोजन से बृहत एलोपेसिया एरिटा का उपचार
  5. एलोपेसिया यूनिफर्सेलिस और टोटेलिस के उपचार में डाइफेन साइक्‍लोप्रोपेनॉन
  6. बृहत विटिलिगो के लिए जोखिम कारकों की पहचान
  7. पैम्फिगस के उपचार में प्रतिदिन मौखिक प्रेडनीसोलोन (1 मि.ग्रा. / कि. ग्रा.) के साथ इंट्रावेनस साइक्‍लोफॉस्‍फेमाइड मासिक पल्‍स (15 मि. ग्रा. / कि. ग्रा.) की दक्षता का मूल्‍यांकन
  8. पार्थेनियम डर्मेटाइटिस के साथ रोगियों में पीठ के ऊपरी हिस्‍से, निचले हिस्‍से और भुजा में पैच परीक्षण का पुन: उत्‍पादन
  9. बेनाइन वेस्‍कुलर घाव, एपिडर्मल और सीबेशियस नेवी, एंजियोफाइब्रोमा तथा केलॉइड में कार्बन डाइऑक्‍साइड लेजर की प्रभावशीलता
  10. वायुजनित संपर्क डर्मेटाइटिस के उपचार में कोर्टिको स्‍टीरॉइड स्‍पेरिंग एजेंट के रूप में एजाथियोप्राइन
  11. गंभीर एडियोपैथिक अर्टिकेरिया के उपचार में प्रतिरक्षी संदमनकारी दवाओं की भूमिका का मूल्‍यांकन करना
  12. वायु जनित संपर्क डर्मेटाइटिस के रोगियों में एजाथियोप्राइन की दीर्घ अवधि सुरक्षा और विषालुता
  13. मल्‍टी बेसिलरी कुष्‍ठ में नई एंटी लेप्रोसी बैक्‍टीरिसाइडल औषधियों से बहु औषधि उपचार द्वारा नियत अवधि (12 सप्‍ताह) की दक्षता का मूल्‍यांकन करना
  14. स्थिर विटिलिगो में पीयूवीए उपचार के बाद टॉपिकल कोर्टिको स्‍टीरॉइड के बाद पंच ग्राफ्टिंग बनाम पंच ग्राफ्टिंग का तुलनात्‍मक अध्‍ययन
  15. पैम्फिगस में डेक्‍सा‍मेथेसॉन साइक्‍लोफॉस्‍फेमाइड पल्‍स उपचार का आगे मूल्‍यांकन
  16. सीमित विटिलिगो के साथ / इसके बिना हेलो नेवी में पंच ग्राफ्टिंग का मूल्‍यांकन

पूर्ण हो चुकी अनुसंधान सहयोगात्‍मक परियोजनाएं

  1. त्‍वचा के तपेदिक के निदान में पीसीआर का मूल्‍यांकन (सूक्ष्‍म जीव विज्ञान, विकृति विज्ञान और जैव सांख्यिकी

    तपेदिक का प्रयोगशाला में निदान स्‍मीयर या बायोप्‍सी तथा जीव संवर्धन में माइकोबैक्‍टीरियम ट्यूबरकुलोसिस के प्रत्‍यक्ष प्रदर्शन पर आधारित है। जबकि अधिकांश प्रकार के त्‍वचा के तपेदिक पॉसीबेसिलरी प्रकार के होते हैं, अत: यह प्रदर्शित या संवर्धित करना कठिन होता है कि यह जीव त्‍वचा में उत्‍पन्‍न हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में कुछ रिपोर्टों में त्‍वचा के तपेदिक के घावों में एम ट्यूबरकुलोसिस डीएनए को अभिज्ञात करने में पीसीआर के उपयोग को दर्शाया गया है। जबकि इस परीक्षण को संभावित रूप से रोग के निदान में मूल्‍यांकित नहीं कियाग या है। हमने प्राइमरों का उपयोग करते हुए पीसीआर का निष्‍पादन किया है तथा इम्‍युनोजेनिक प्रोटीन एमपीबी64 जो एम ट्यूबरकुलोसिस कॉम्‍प्‍लेक्‍स का विशिष्‍ट जीन है, इसके प्रकाशित क्रम के आधार पर संपरीक्षकों का उपयोग किया है। यह परीक्षण 64 रोगियों और 45 कंट्रोल में किया गया था। इस अध्‍ययन के प्रयोजन के लिए रोगियों को इन समस्‍याओं के आधार पर रोगी परिभाषित किया गया : त्‍वचा के घाव, आकारिकी की दृष्टि से त्‍वचा के तपेदिक का संकेत देते हैं एक धनात्‍मक मोंटूस परीक्षण, त्‍वचा की बायोप्‍सी में ग्रेन्‍यूलोमेटस डर्मेटाइटिस तथा मानक तपेदिक रोधी उपचार की क्लिनिकल प्रतिक्रिया कंट्रोल व्‍यक्तियों को ऐसा रोगी परिभाषित किया गया जिन्‍होंने क्लिनिकल और / या बायोप्‍सी की प्राप्तियों को त्‍वचा के तपेदिक के अलावा निदान का एक निश्चित संकेत बताया। कुल 64 व्‍यक्तियों में से 18 और 45 कंट्रोल व्‍यक्तियों में से 11 में पीसीआर पर धनात्‍मक परिणाम मिले। इस प्रकार इस परीक्षण में 28.1 प्रतिशत की संवेदनशीलता, 75.6 प्रतिशत की विशिष्‍टता और 1 : 1 के धनात्‍मक परिणाम का संभावित अनुपात मिला। त्‍वचा के तपेदिक के लिए पीसीआर हमारे हाथों में एक उपयोगी परीक्षण प्रतीत होता है। अत: त्‍वचा के तपेदिक के लिए एक भरोसेमंद नैदानिक परीक्षण के रूप में खोज जारी रहनी चाहिए।

 

  • टॉपिकल क्‍लोटरी मेजॉल इन टाइन्‍स क्रूरिस और टाइन्‍स कॉर्पोरिस के साथ तुलनात्‍मक रूप से टॉपिकल ब्‍यूटेनाफाइन की दक्षता और निरापदता का क्लिनिकल मूल्‍यांकन (सूक्ष्‍म जीव विज्ञान, प्रयोगशाला चिकित्‍सा)

    ब्‍यूटेनाफाइन हाइड्रोक्‍लोराइड एक नया बेंजिल एमिन व्‍युत्‍पन्‍न है जिसमें डर्मेटोफाइट के खिलाफ प्राथमिक कवक रोधी सक्रियता पाई जाती है। हमने इन टाइन्‍स क्रूरिस और टाइन्‍स कॉर्पोरिस के उपचार में टॉपिकल क्‍लोटरीमेजॉल के साथ ब्‍यूटेनाफाइन की दक्षता और निरापदता का अध्‍ययन किया है जिनका उपयोग अध्‍ययन अवधि (फरवरी से दिसम्‍बर 2000 के बीच) हमारे अस्‍पताल के त्‍वचा ओपीडी में आने वाले रोगियों पर किया गया है। अध्‍ययन में शामिल करने के मानदण्‍ड पूरे करने वाले सभी रोगियों का 2 सप्‍ताह के लिए ब्‍यूटेनाफाइन प्रतिदिन एक बार या 4 सप्‍ताह तक क्‍लोटरीमेजॉल प्रतिदिन 2 बार देने के अध्‍ययन समूहों में दोहरे यादृच्छिक रूप में रखा गया था। डर्मेटोफाइट के लिए छिलन और संवर्धन के पोटेशियम हाइड्रॉक्‍साइड की निर्मिती में क्लिनिकल जांच और सूक्ष्‍म जैविकी का आयोजन आधारभूत और सप्‍ताह 1, सप्‍ताह 2, सप्‍ताह 4, सप्‍ताह 6 और सप्‍ताह 8 पर उपचार आरंभ करने के बाद किया गया। इसका दक्षता का मूल्‍यांकन माइकोलॉजिकल तथा क्लिनिकल उपचार की उपस्थिति में किया गया था। प्रतिकूल अभिक्रिया, यदि कोई हो, प्रत्‍येक विजिट पर दर्ज की गई थी। इस अध्‍ययन में 75 रोगियों का नाम दर्ज किया गया था, इसमें से 37 ब्‍यूटेनाफाइन समूह और 9 रोगियों को क्‍लोटरीमेजॉल समूह में रखा गया जो अनुवर्तन के लिए नहीं आए। इनके संकेत और लक्षण के अंक दोनों समूह में उल्‍लेखनीय रूप से कम हुए। अनेक रोगियों में 8वें सप्‍ताह के अंत तक माइकोलॉजिकल सुधार (केओएच निर्मिती पर) ब्‍यूटेनाफाइन तथा क्‍लोटरीमेजॉल उपचार समूहों में 20/22 रोगियों तथा 27/28 रोगियों में क्रमश: देखा गया। प्रत्‍येक समूह के तीन रोगियों में उपचार बंद करने पर इनके दोबारा प्रकट होने के लक्षण दिखाई दिए। ब्‍यूटेनाफाइन 1 प्रतिशत क्रीम टॉपिकल रूप से लगाने पर प्रभावी है, जबकि इन टाइन्‍स क्रूरिस और टाइन्‍स कॉर्पोरिस के उपचार में 1 प्रतिशत क्‍लोटरीमेजॉल को केवल एक बार लगाने का लाभ है तथा इससे उपचार की अवधि छोटी रहती है।

 

 

  • एक्टिनोमाइकोटिक माइसे‍टोमास के उपचार के लिए दो चरण की अनुसूची (सूक्ष्‍मजीव विज्ञान)

    एक्टिनोमाइकोटिक माइसे‍टोमास आम तौर पर एंटीबायोटिक से उपचार करने पर धीरे प्रतिक्रिया देता है। क्लिनिकल समाधान में तेजी लाने के एक प्रयास में हमने दो चरण की व्‍यवस्‍था अपनाई जिसमें पेनीसिलिन, जेंटामाइसिन और कॉट्रीमेक्‍सॉल को 5-7 सप्‍ताह तक उपचार के सघन चरण में दिया और इसके बाद एमॉक्सीसिलिन तथा कॉट्रीमेक्‍सॉल के साथ अनुरक्षण उपचार किया। इससे 7 रोगियों का उपचार किया गया और इन सभी में सघन चरण के बाद बहाव और सूजन में उल्‍लेखनीय कमी दशाई गई। अनुरक्षण उपचार तब तक जारी रखा गया जब तक घाव क्लिनिकल दृष्टि से ठीक नहीं हो गए और इसके लगभग 6 माह बाद पुन: 6-16 माह (औसत 10.7 माह) के लिए अनुरक्षण उपचार दिया गया, और रोगी 6-4 माह की पूर्व उपचार अनुवर्तन औसत अवधि के दौरान रोग मुक्‍त बने रहें। अन्‍य दो रोगियों में संतोषजनक सुधार दिखाई दिया और उन्‍हें अनुरक्षण उपचार देना जारी रखा गया। दुष्‍प्रभावों से 2 रोगियों में उपचार अनुसूच में संशोधन की अनिवार्यता उत्‍पन्‍न हुई, परन्‍तु जिम्‍मेदार दवा को बंद करने से इसमें बदलाव देखा गया। इस उपचार की अनुसूची से आरंभिक सघन चरण के दौरान तीव्र क्लिनिकल प्रतिक्रिया उत्‍पन्‍न होती है और एक संपूर्ण सुधार प्राप्‍त करने के लिए अनिवार्य उपचार का लंबा अनुरक्षण चरण होता है।

    सहयोगात्‍मक अनुसंधान जारी

    1. गुर्दा प्रतिरोपण ग्राही रो‍गियों में डर्मेटोलॉजिकल जटिलताएं : 500 रोगियों का अनुवर्तन अध्‍ययन (गुर्दा रोग विभाग)
    2. माइकोसिस फंगोसाइड के उपचार के लिए इलेक्‍ट्रॉन बीम रेडिएशन उपचार की भूमिका (रेडिएशन ओंकोलॉजी विभाग)

    2000-2001 के दौरान पत्रिकाओं में प्रकाशन

      1. शर्मा वी के पेच टेस्टिंग विद यूरोपियन स्‍टैंडर्ड सीरिज एण्‍ड कम्‍पोजिट एक्‍सट्रेक्‍ट्स इन पेशेंट्स विद एयर बोर्न कॉन्‍टेक्‍ट डरमेटीसिस, कॉन्‍टेक्‍ट डरमेटीटिस 2001:44:49-50.
      2. पंचेलिया एस, हाण्‍डा एस, विजया लक्ष्‍मी, शर्मा वी के, कुमार बी. सेन्‍सीटाइजर्स कोमनली कॉउजिंग एलर्जिक कॉन्‍टेक्‍ट डरमेटीटिज फ्रॉम कॉस्‍मेटिक्‍स, कॉन्‍टेक्‍ट डरमेटीटिस 2000; 43:311-312.
      3. शर्मा वी के. साहू बी., प्रेरिजो-नोडुलेरिस लाइक लिसन इन पार्थेनियम डरमेटीटिस. कॉन्‍टेक्‍ट डरमेटीटिस 000;42 (4):235.
      4. सूद ए, शर्मा एस, शर्मा वी. के. मोर्फिया विद मूसिन डिपोजिट्स मॉसक्‍यूरेडिंग एज स्‍केलरोमाइक्‍सोएडिमा. इंडियन जे डरमेटोल वेनेरोल लेपरोल 2000;66:109.
      5. वाटव एम, शर्मा वी के, साहनी आई एम एस, कुमार बी. इवेल्‍यूएशन ऑफ पेच टेस्‍ट इन आइडेंटीफिकेशन ऑफ कॉसेटिव एजेंट इन ड्रग रेशिज ड्यू टू एंटीएप्‍लीपटिक्‍स. इंडियन जे डरमेटोल वेनेराल लेपरोल 2000; 66:132-135.
      6. शर्मा वी के, प्रसाद एच आर वाई. मैनेजमेंट ऑफ एंड्रोजेनिक एलोपीसिया. इंडियन जे डरमेटोल 2000:45:54-61.
      7. शर्मा एन, के वी के, गुप्‍ता ए, कौर आई, गांगुली वी के, इम्‍युनोलॉजिकल डीफेक्‍ट इन लेप्रोसी पेशेंट अल्‍टर्ड टी लिम्‍फोसाइट्स सिगनलि. एफईएमएस इम्‍युनोल माइक्रोबॉयल. 1999; 23 (4):355-62.
      8. सरकार आर, कौर आई, दास ए, शर्मा वीके. मैक्‍यूलर लिशन्‍स इन लेप्रोसी. ए क्लिनिकल, बैक्‍टीरियोलॉजिकल एण्‍ड हिस्‍टोपैथोलॉजिकल स्‍टडी. जे डरमेटोल 1999 26(9):569-76.
      9. गुप्‍ता ए, शर्मा वीके, वोहरा एच, गांगुली एनके, इनहिबिशन ऑफ एपॉप्‍टॉसिस बाय आइनोमाइसिन एण्‍ड जिंक इन पेरीफेरल ब्‍लड मोनोन्‍यूक्लियर सेल (पीबीएमसी) ऑफ लेप्रोसी पेशेंट्स. क्लिन एक्‍स. इम्‍युनोल 1999 117 (1):56-62.
      10. श्रीनिवास एसद्व नेहरू वीआई, बापूराज जेआर, शर्मा वी के, मान एसबी. सीटी फिंडिंग्‍स इन इनवॉल्‍वमेंट ऑफ द पैरानसल बाय लेप्रोमोटस लेप्रोसी. बीआर जे. रेडियोल. 1999; 72(855):271-3.
      11. गुप्‍ता ए, शर्मा वीके, वोहरा एच, गांगुली एनके. स्‍पॉन्‍टेनियस एपॉप्‍टॉसिस इन पेरीफेरल ब्‍लड मोनोन्‍यूक्लियर सेल ऑफ लेप्रोसी पेशेंट्स : रोल ऑफ साइटोकाइन इम्‍युनोल मेड माइक्रोबायोल 1999 24(1):49-55.
      12. सोनी ए, मित्तल बीआर, कौर आई, शर्मा वीके, पाठक सीएम, कुमार बी. बोन सिंटीग्राफी इन लेप्रोसी. इंट जे लेपर 1998; 66(4):483-4.
      13. सिरका सीएस, रामम एम, मित्तल आर, खेतान बीके, वर्मा केके. ओलमस्‍टेड सिंड्रोम. इंडियन डरमेटोल वेनेरोल लेप्रोल 1999; 65:237-239.
      14. रामम एम, मनचंदा वाई, वर्मा के के, शर्मा वी के. रिप्रोडेक्‍टेबिलटी ऑफ टायटर ऑफ कॉन्‍टेक्‍ट हाइपरसेंस्‍टीविटी टू पार्थेनियम हाइस्‍टेरोफोरस, कॉन्‍टेक्‍ट डरमेटीटिस 2000; 42:366.
      15. रामम एम, गर्ग टी, डीसूजा पी, वर्मा के के, खेतान बी के. सिंह एम के, बनर्ती यू. ए टू-स्‍टेप शैड्यूल फॉर दि ट्रीटमेंट ऑफ एक्‍टीनोमायकोटिक माइसिटोमास. एक्‍टा डरमा-वेनेरोल 2000; 80:378-380.
      16. वर्मा केके, लखनपाल एस, सिरका सीएस, ख्‍ेतान बीके, रामम एम, बनर्जी यू. प्राइमरी क्‍यूटेनस एटिनोमिसोसिस. एक्‍सटा डर्म-वेनेरोल 1999;78:327.
      17. ग्रोवर जी के, वत्‍स वी, गोपालकृष्‍णा आर, रामम एम. थेलिडोमाइड : ए रिलूक. नेटल मेड जे इंडिया 2000; 13:132-141.
      18. शर्मा वी के, अचर ए, रामम एम, सिंह एम के, मल्‍टीपल कुटेनियस हॉर्न्‍स ओवरलेइंग लीचेन प्‍लेनस हाइपरट्रोफिकस. बर जे डरमेटोल 2001; 144:424-425.
      19. रामम एम, डिसूजा पी, रवीन्‍द्र प्रसाद जे एस, लेयर के वी, सिंह एम के. माइकोसिस फंगोइड्स ट्रीटिड विद पीयूबीए एंड टॉपिकल कोरिटिकोस्‍टेरोयड्स इंड जे डरमेटोल वेनेरोल लेपरोल 2000;66:251-253.
      20. रामम एम, कुमरा एल. सिस्‍टेमिक कोरटीकोस्‍टेरायड थेरेपी एण्‍ड दि हाइपोथेलमो-पिट्यूटरी एडरनल एक्सिस. इंड. जे. ऑफ डरमेटोल, 2001; 46:1-7.
      21. वर्मा के के, मित्तल आर, मनचंदा वाई, खेतान बी के : लिचेन प्‍लेनस ट्रीटिड विद बिटामेथासोन ओरल मिनी पल्‍स थेरेपी. इंडियन जे डरमेटोल वेनेरोल लेपेराल 2000; 66: 34-35.
      22. वर्मा के के, राठी एस, पसरीचा जे एस : फेलियर ऑफ पेन्‍टोक्‍सीफाइलिन टू इफेक्‍ट एयरबोर्न कॉन्‍टेक्‍ट डरमेटीटिस कॉउज्‍ड बाय पार्थेनियम. इंड जे डरमेटोल वेनेरोल लेपरोल 2000; 66: 129-131.
      23. वर्मा के के लखनपाल एस, सिरका सीएस, खेतान बी के, बनर्जी यू : डिस्‍एमीनेटिड मुकोकुटेनियस बलास्‍टोमायोकोसिस इन ऐन इम्‍युनोकोम्‍पीटेंट इंडियन पेशेंट ट्रीटिड विद किटोकोनेजोल. जे यूरो एकेड डरमेटोल वेनेरोल 2000; 14: 332-333.
      24. वर्मा के के, पारिदा डी के, रथ जी के : कुटेनियुस टी-सेल लिमफोमा ट्रीटिड विद इलेक्‍ट्रॉन बीम रेडिएशन-इंडियन एक्‍सपीरियंस. जे यूरो एकेड डरमेटोल वेनेरोल 2000; 14 (सप्‍ल 1): W 41 (एबस्‍ट्र)
      25. वर्मा के, वर्मा के के : एनकेनटाइल पीरियोकुलर हिमेनजियोमा ट्रीटिड विद बीटामेथोसोन ओरल मिनी पल्‍स थेरेपी. इंड जे पेड 2001; 68: 367-368.
      26. खेतान बी के, मित्तल आर, रामम एम, जैन वाय, फलैक्‍सूरल किरेटोडर्मा, रैक्‍यूरैंट पुरपुरा, गेस्‍टोइनट्रीटिस एण्‍ड रेस्‍पाइरेटरी ट्रेक्‍ट इंफैक्‍शन इंडियन जे पीडियाट्रिक डरमेटोल, 2000; 3: 23-24.
      27. सूद ए, खेतान बी. के, खन्‍ना एन के, कुमार आर., सिंह एम के. सिरिंजोसिस्‍टेडरनोमा पेपीलीफिरम एट अनयूजुअल साइट्स. इंडियन जे डरमेटोल वेनेरोल लेप्रोल 2000; 66:328-329.

    पुस्‍तकों में अध्‍याय और मोनोग्राफ

        1. शर्मा वीके, ट्रीटमेंट ऑफ क्‍यूटेनस ट्यूबरकुलोसिस एण्‍ड माइकोबैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन्‍स। इन वर्क बुक ऑफ 4 नेशनल सीएमई ऑन डरमेटोल पैथोलॉजी, नई दिल्‍ली, 2000.
        2. शर्मा वीके : ट्रीटमेंट ऑफ डिफिकल्‍ट सोरियासिस इन, डर्मेटोलॉजी अपडेट-2000, एडिटिड बाय कोल. एस. के. सयाल, बेस अस्‍पताल, दिल्‍ली कैंट
        3. रामम एम, सतीश डी, थोमस जे, पारीख डीए, स्किन डिजीज इन चिल्‍ड्रन, इन : पार्थसार्थी ए, मेनन पीएसएन, नायर एमकेसी, लोकेश्‍वर एमआर, श्रीवास्‍तव आरएन, भावे एसवाय एट एल, एडिटर्स आईएपी टेक्‍स्‍टबुक ऑफ पीडियाट्रिक्‍स, नई दिल्‍ली, 1999, p 814-820.
        4. रामम एम. क्‍यूटेनस ट्यूबरकुलोसिस इन : शर्मा एसके, मोहन ए, एडिटर्स, ट्यूबरकुलोसिस, नई दिल्‍ली,जयपी ब्रदर्स मेडिकल पब्‍लीशर्स (प्रा.) लि., 2001, P 261-272.
        5. रामम एम, गुप्‍ता एलके, डर्मेटोलॉजिक एमर्जेन्‍सी इन चिल्‍ड्रन इन : सिंह एम, एडिटर, मेडिकल एमर्जेन्‍सी इन चिल्‍ड्रन, 3 एडी‍शन, नई दिल्‍ली, 2000, पेज 587-601.
        6. खेतान बीके, मित्तल आर �रोल ऑफ विटामिन ई एज एन एंटीऑक्‍सीडेंट इन डर्मेटोलॉजी. इन, सचिनंद एस, एडिटर, ''रोल ऑफ एंटीऑक्‍सीडेंट इन डर्मेटोलॉजी'' पब्लिशड बाय 28 नेशनल कॉम्‍प्‍लेक्‍स ऑफ आईएडीएवीएल, 2000: 57-60.
        7. खेतान बीके, पल्‍स थैरेपी इन डर्मेटोलॉजी इन, 'डर्मेटोलॉजी इन, 'डर्मेटोलॉजी अपडेट-2000� एडिटिड बाय कॉल. एस के सयल, बेस अस्‍पताल, दिल्‍ली कैंट
        8. खेतान बीके, दत्ता गुप्‍ता, एस. डीसूजा पी. फंगल इंफेक्शन्‍स इन, वर्कबुक ऑफ 4 नेशनल सीएमई ऑन डर्मेटोपैथोलॉजी, नई दिल्‍ली, 2000.
        9. करंट लिटरेचर डर्मेटोलॉजी 1999-2000. पसरिचा जेएस, मिश्रा आरएस, रमेश वी, रामम एम, खेतान बीके एट एल. आईएडीवीएल (दिल्‍ली स्‍टेट ब्रांच) नई दिल्‍ली.
        10. वर्मा के के एण्‍ड सिंह एमके : वेसीक्‍यूलोब्‍यूलस डिस्‍आर्डर, इन वर्क-बुक - 4 नेशनल सीएमई ऑन डर्मेटोलॉजी, एम्‍स, नई दिल्‍ली, 2001; p 1-6.

    उल्‍लेखनीय आयोजन

      1. यौन संचारित लोगों और प्रजनन मार्ग संक्रमणों पर भारत अमेरिकी कार्यशाला, नई दिल्‍ली (8-10नवम्‍बर, 2000) जैव प्रौद्योगिकी विभाग और विकृति विज्ञान विभाग के सहयोग से
      2. 24-25 फरवरी 2001 को विकृति विज्ञान विभाग के सहयोग से डर्मेटोपैथोलॉजी में चौथा राष्‍ट्रीय सीएमई
      3. प्रो. वी के शर्मा को डर्मेटोलॉजी तथा यौन संचारित रोगों के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ''लाला राम चंद्र कंधारी'' पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया
      4. प्रो. वी के शर्मा ने अध्‍यक्ष, इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्‍ट, वेनेरोलॉजिस्‍ट एण्‍ड लेप्रोलॉजिस्‍ट (दिल्‍ली राज्‍य शाखा) वर्ष 2000 के तथा मानद सचिव - कॉन्‍टेक्‍ट एण्‍ड ऑक्‍यूपेशनल डर्मेटोसिस फोरम ऑफ इंडिया (सीओडीएफआई) वर्ष 2000 के रूप में कार्य किया
      5. डॉ. बी. के खेतान ने वर्ष 2000 के लिए उपाध्‍यक्ष, इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्‍ट, वेनेरोलॉजिस्‍ट एण्‍ड लेप्रोलॉजिस्‍ट (डीएसबी) के रूप में कार्य किया
      6. डॉ. के. के. वर्मा ने वर्ष 2000 के लिए मानद सचिव, इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्‍ट, वेनेरोलॉजिस्‍ट एण्‍ड लेप्रोलॉजिस्‍ट (डीएसबी) के रूप में कार्य किया

 

Zo2 Framework Settings

Select one of sample color schemes

Google Font

Menu Font
Body Font
Heading Font

Body

Background Color
Text Color
Link Color
Background Image

Header Wrapper

Background Color
Modules Title
Text Color
Link Color
Background Image

Menu Wrapper

Background Color
Modules Title
Text Color
Link Color
Background Image

Main Wrapper

Background Color
Modules Title
Text Color
Link Color
Background Image

Inset Wrapper

Background Color
Modules Title
Text Color
Link Color
Background Image

Bottom Wrapper

Background Color
Modules Title
Text Color
Link Color
Background Image
Background Color
Modules Title
Text Color
Link Color
Background Image
 
Top of Page